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नेतà¥à¤°à¤°à¥‹à¤—
शरीर के अनà¥à¤¯ अंगों की à¤à¤¾à¤à¤¤à¤¿ नेतà¥à¤° à¤à¥€ रोगगà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ होते हैं। यह मानव नेतà¥à¤° रोगों और विकारों की à¤à¤• आंशिक सूची है। विशà¥à¤µ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संगठन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤•ाशित वरà¥à¤—ीकरण, बीमारियों और चोटों में जाना जाता है, रोग और संबंधित सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का अंतरà¥à¤°à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सांखà¥à¤¯à¤¿à¤•ी वरà¥à¤—ीकरण की सूची इस पà¥à¤°à¤•ार है।
बिलनी (Sty या Stye)
पलकों में बिलनी निकल आती है। जिसे अनà¥à¤œà¤¨à¥€ à¤à¥€ कहते हैं। पलकों (eyelashes) के वसामय गà¥à¤°à¤‚थियों (Sebaceous glands) में à¤à¤• जीवाणॠसंकà¥à¤°à¤®à¤£ है।
नेतà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤¤à¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤¨à¥à¤¥à¤¿ (Chalazion)
पलक में à¤à¤• पà¥à¤Ÿà¥€ (cyst) (आमतौर पर ऊपरी पलक में)
वरà¥à¤¤à¥à¤®à¤¾à¤‚तशोध (Blepharitis)
पलकें और eyelashes सूजन, eyelashes के पास सफेद परतदार तà¥à¤µà¤šà¤¾
कंजाकà¥à¤¤à¤¿à¤µà¤¾ (Conjunctiva) के विकार,
शà¥à¤µà¥‡à¤¤à¤ªà¤Ÿà¤² (Sclera), कॉरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ (Cornea), परितारिका (Iris) और रोमक शरीर (Ciliary body) के विकार
== लेंस (Lens) के विकार, ==लेंस चाहिठà¤à¥‚रा कलर का लेंस चाहिà¤
रकà¥à¤¤à¤• (Choroid) और चितà¥à¤°à¤ªà¤Ÿ-पऱदा (Retina) के विकार,
1 रकà¥à¤¤à¤•चितà¥à¤°à¤ªà¤Ÿ में सूजन (Chorioretinal Inflammation),
2 रकà¥à¤¤à¤• (Choroid) के अनà¥à¤¯ विकार,
3 किसी अनà¥à¤¯ दà¥à¤¸à¤°à¥€ बिमारियों मैं रकà¥à¤¤à¤•चितà¥à¤°à¤ªà¤Ÿ (Chorioretinal) विकार का वगॊकरण
4 पऱद (Retina) का उखड़ना और टूटना
5 पऱदा की संवहनी (Vascular) में रà¥à¤•ावट आना
6 पऱदा के अनà¥à¤¯ विकार
7 किसी अनà¥à¤¯ दà¥à¤¸à¤°à¥€ बिमारियों मैं पऱदा के विकारों का वगॊकरण
नेतà¥à¤° की चोटें
नेतà¥à¤° में चोट लगना खतरनाक होता है। साधारण खरोंच शीघà¥à¤° अचà¥à¤›à¥€ हो जाती है। à¤à¥‡à¤¦à¤• घाव à¤à¤¯à¤‚कर होते हैं। इनमें सांदà¥à¤° दà¥à¤°à¤µ के बाहर निकल आने, लेंस के विसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨, उपसरà¥à¤— आदि का खतरा होता है। à¤à¥‹à¤¥à¤°à¥‡ हथियार की चोट में अंत:कà¥à¤·à¤¤à¤¿ होती हैं, यथा दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤ªà¤Ÿà¤² का विलगन, लेंस विसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨ आदि। नेतà¥à¤° में बाहरी चीज का गिरना à¤à¤• आम घटना है। मà¥à¤–à¥à¤¯ बात यह है कि किरकिरी अगर कारà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ पर है तो उसे नेतà¥à¤° चिकितà¥à¤¸à¤• को ही निकालने दें।
नेतà¥à¤° उपसरà¥à¤— (eye infection)
पलकों में बिलनी निकल आती है। अशà¥à¤°à¥à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¨à¥€ और अशà¥à¤°à¥à¤•ोश के पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¹ में आà¤à¤–ों से पानी अधिक आता है। कंज़ंकà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤µà¤¾ में कई पà¥à¤°à¤•ार के पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¹ होते हैं। इनमें विषाणॠजनà¥à¤¯ रोहा à¤à¤¾à¤°à¤¤ में अंधेपन का मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण है। सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ से अब 'रोहे' का निराकरण संà¤à¤µ है। सूजाकजनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¹ à¤à¤¯à¤‚कर होता है। कॉरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में उपदंश और तपेदिक के कारण पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¹ होते हैं। पिलकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¨à¥à¤²à¤° पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¹ में कॉरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के किनारे पीले दाने निकल आते हैं। यह कà¥à¤·à¤¯ रोग या à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के कारण होता है। फालिकà¥à¤¯à¥‚लर पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¹ में सफेदी पर लाल दाने निकलते हैं। जीवाणà¥à¤“ं से 'आà¤à¤– आने' की बीमारी होती है। कॉरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के घाव खतरनाक होते हैं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि अचà¥à¤›à¥‡ होने पर उस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर सफेदी आ जाती है, जिसे जाला, माड़ा आदि कहते हैं। इस पà¥à¤°à¤•ार की अंधता दूर करना संà¤à¤µ नहीं था, पर अब नेतà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¤à¤¾ से सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ कॉरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ लेकर विकृत कॉरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर रोपित किया जा सकता है। नेतà¥à¤° बैंक आज विशेष चरà¥à¤šà¤¾ के विषय हैं।
आइरिस और रोमक पिंड के पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¹, आइराइडो साइकà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸, कषà¥à¤Ÿà¤•ारक होते हैं और बहà¥à¤§à¤¾ उपदंश, कà¥à¤·à¤¯ या à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के कारण होते हैं।
लेंस में कोई à¤à¥€ रोग होने पर वह अपारदरà¥à¤¶à¥€ हो जाता है। वृदà¥à¤§à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में सामानà¥à¤¯ रूप से à¤à¥€ लेंस निकाल दिया जाता है और उसी की शकà¥à¤¤à¤¿ का चशà¥à¤®à¤¾ पहनने से पà¥à¤¨: दृषà¥à¤Ÿà¤¿ आ जाती है। सà¥à¤¶à¥à¤°à¥à¤¤ ने मोतियाबिंद निकालने की चरà¥à¤šà¤¾ की है। वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ यग में पà¥à¤°à¤¥à¤® बार फà¥à¤°à¤¾à¤‚स के जैकà¥à¤¯à¥‚स डेवियल ने यह शलà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ आरंठकी। यदà¥à¤¯à¤ªà¤¿ आज उनà¥à¤¨à¤¤ रूप में यह ऑपरेशन सà¤à¥€ को सà¥à¤²à¤ है, फिर à¤à¥€ लोग अनाड़ी साथियों से इलाज कराते हैं। ये लोग सूजे से कोंचकार लेंस को पशà¥à¤š à¤à¤¾à¤— में ठेल देते हैं, जिसे तà¥à¤°à¤‚त दृषà¥à¤Ÿà¤¿ आ जाती है, किंतॠबाद में विघटन के फलसà¥à¤µà¤°à¥‚प सदा के लिठनेतà¥à¤° जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¹à¥€à¤¨ हो जाते हैं।
दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤ªà¤Ÿà¤² में पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¹, विलगन, रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤µ आदि पà¥à¤°à¤®à¥à¤– रोग हैं। शरीर के रोगों का नेतà¥à¤° पर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ होता है, यथा केंदà¥à¤°à¥€à¤¯ तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा के रोग मधà¥à¤®à¥‡à¤¹, विटामिन हीनता, उपदंश, कà¥à¤·à¤¯, गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ के रोग और कैंसर आदि। नेतà¥à¤° में साधॠऔर दà¥à¤°à¥à¤¦à¤®à¥à¤¯ अरà¥à¤¬à¥à¤¦ à¤à¥€ होते हैं। नेतà¥à¤°à¥‹à¤¦ का चाप बढ़ने से 'गà¥à¤²à¥‰à¤•ोमा' होता है। यह अचानक आरंठहो सकता है, या फिर शनै: शनै: होता है। इससे तीवà¥à¤° नेतà¥à¤° पीड़ा, सिरदरà¥à¤¦, वमन, पà¥à¤°à¤•ाश के चारों ओर रंगीन चकà¥à¤•र, दृषà¥à¤Ÿà¤¿ का धà¥à¤‚धलापन, थकान आदि लकà¥à¤·à¤£à¥ होते हैं और अंत में नेतà¥à¤°à¤œà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ चली जाती है। इसकी चिकितà¥à¤¸à¤¾ शीघà¥à¤° करानी चाहिà¤à¥¤ इसमें औषधियाठ(जैसे à¤à¤¸à¤°à¥€à¤¨, डायमाकà¥à¤¸ आदि) और शलà¥à¤¯à¤šà¤¿à¤•ितà¥à¤¸à¤¾ संà¤à¤µ हैं। गà¥à¤²à¥‰à¤•ोमा का à¤à¤• वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• कारण है, बेरी बेरी। खनिकों में अकà¥à¤·à¤¿à¤¦à¥‹à¤²à¤¨ रोग होता है, जिसमें आà¤à¤– की पà¥à¤¤à¤²à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤° नहीं रहती। कान के रोगों से à¤à¥€ यह लकà¥à¤·à¤£ पà¥à¤°à¤•ट हो सकता है। बहà¥à¤§à¤¾ यह सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤, अथवा जानबूठकर पैदा किया, हो सकता है।
नेतà¥à¤°à¤ªà¤°à¥€à¤•à¥à¤·à¤¾ का यंतà¥à¤°
नेतà¥à¤°à¤ªà¤°à¥€à¤•à¥à¤·à¤¾ में पà¥à¤°à¤®à¥à¤– यंतà¥à¤° है नेतà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¥€ (ऑफà¥à¤¥à¥ˆà¤²à¥à¤®à¥‰à¤¸à¥à¤•ोप), जिससे दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤ªà¤Ÿà¤² देख सकते हैं। सà¥à¤²à¤¿à¤Ÿ लैंप से नेतà¥à¤° की सूकà¥à¤·à¥à¤® परीकà¥à¤·à¤¾ करते हैं। सामानà¥à¤¯ परीकà¥à¤·à¤¾ के लिठपेन टॉरà¥à¤š, कॉरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤² लà¥à¤ª और रैटिनॉसà¥à¤•ोप का उपयोग होता है। पैरीमीटर, वरà¥à¤£à¤¾à¤‚धता परीकà¥à¤·à¤¾ के यंतà¥à¤° तथा सà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¥‰à¤¸à¥à¤•ोप का पहले उलà¥à¤²à¥‡à¤– हो चà¥à¤•ा है।
नेतà¥à¤° को देखरेख
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ कवियों ने यही कामना की है कि हम सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ नेतà¥à¤°à¥‹à¤‚ से देखते हà¥à¤ सौ शरदॠजिà¤à¤à¥¤ नेतà¥à¤°à¤¸à¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सामानà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤¥à¥à¤¯ से विलग नहीं है। आहार-विहार के नियमों का पालन करने से नेतà¥à¤° à¤à¥€ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहेंगे। नेतà¥à¤° के लिठविटामिन ठऔर विटामिन बी का विशेष महतà¥à¤µ है। आà¤à¤– की रकà¥à¤·à¤¾ लाइसोज़ाइम करते हैं, अतà¤à¤µ शौकिया दवाओं से नेतà¥à¤° धोना ठीक नहीं है।
पà¥à¤°à¤•ाशवà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾
सामानà¥à¤¯ कारà¥à¤¯ के लिठ5 फà¥à¤Ÿ-कैंडिल रोशनी परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ है। पीत पà¥à¤°à¤•ाश सबसे अचà¥à¤›à¤¾ होता है। चमक से बचना चाहिà¤à¥¤ पà¥à¤°à¤•ाश वैषमà¥à¤¯ से à¤à¥€ दूर रहें। पढ़ते समय रोशनी पीछे या बाà¤à¤ से आनी चाहिà¤à¥¤ अचà¥à¤›à¥€ सà¥à¤¯à¤¾à¤¹à¥€, अचà¥à¤›à¥‡ आकार के अकà¥à¤·à¤° तथा पंकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की सही दूर पढ़ने में सहायक होते हैं। किस काम में कितनी रोशनी चाहिà¤, यह संलगà¥à¤¨ चारà¥à¤Ÿ में दिया गया है। नेतà¥à¤° की रकà¥à¤·à¤¾ करें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि नेतà¥à¤°à¤œà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ के बिना जीवन सूना हो जाता है।
पà¥à¤°à¤•ाश की मातà¥à¤°à¤¾ (इलà¥à¤¯à¥à¤®à¤¿à¤¨à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤‚ग सोसाइटी की सिफारिश)
फà¥à¤Ÿ-कैंडिल --- कारà¥à¤¯
50 से ऊपर -- अतà¥à¤¯à¤‚त बारीक विशà¥à¤¦à¥à¤§à¤¤à¤¾ का, विà¤à¥‡à¤¦à¤• कारà¥à¤¯à¥¤
25 से 50 -- देर तक दृषà¥à¤Ÿà¤¿ का उपयोग माà¤à¤—नेवाले काम; कà¥à¤·à¥€à¤£ वैषमà¥à¤¯ और बारीकीवाले काम।
15 से 25 -- लंबी अवधि के निरà¥à¤£à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• नेतà¥à¤° के काम, जैसे पà¥à¤°à¥‚फ पढ़ना, मशीन के पà¥à¤°à¥à¤œà¥‡à¤‚ फिट करना।
10 से 15 -- बैठकर करने के काम, जैसे पढ़ना, सीना आदि।
6 से 10 -- मामूली पढ़ाई, बड़ी मशीनों के पà¥à¤°à¥à¤œà¥‡ फिट करना।
2 से 4 -- सामानà¥à¤¯, कोई विशेष कारà¥à¤¯ नहीं।
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